राष्ट्रीय गान। जन-गण....

Author: रविन्द्र नाथ टैगोर

राष्ट-गान (National Anthem) संवैधानिक तौर पर मान्य होता है और इसे संवैधानिक विशेषाधिकार प्राप्त होते है। रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित," जन- गण मन" हमारे देश भारत का राष्ट्र- गान हैं। किसी भी देश में राष्ट्र-गान का गाया जाना अनिवार्य हो सकता है और उसके असम्मान या अवहेलना पर दंड का विधान भी हो सकता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यदि कोई व्यक्ति राष्ट-गान के अवसर पर इसमें सम्मिलित न होकर, केवल आदरपूर्णक मोन खड़ा रहता हैं तो उसे अवहेलना नहीं कहा जा सकता। भारत में धर्म इत्यादि के आधार पर लोगों को ऐसी छूट दी गई है।

जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
पंजाब-सिंध-गुजरात-मराठा
द्राविंड-उत्कल-बंग
विंध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशीष मांगे
गाहे तव जय गाथा
जन- गण मंगलदायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय-जय-जय, जय हे।
                                     रविन्द्रनाथ टैगोर