* राष्ट्रीय गान: जन-गण....
Author: रविन्द्र नाथ टैगोर
राष्ट-गान (National Anthem) संवैधानिक तौर पर मान्य होता है और इसे संवैधानिक विशेषाधिकार प्राप्त होते है। रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित," जन- गण मन" हमारे देश भारत का राष्ट्र- गान हैं। किसी भी देश में राष्ट्र-गान का गाया जाना अनिवार्य हो सकता है और उसके असम्मान या अवहेलना पर दंड का विधान भी हो सकता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यदि कोई व्यक्ति राष्ट-गान के अवसर पर इसमें सम्मिलित न होकर, केवल आदरपूर्णक मोन खड़ा रहता हैं तो उसे अवहेलना नहीं कहा जा सकता। भारत में धर्म इत्यादि के आधार पर लोगों को ऐसी छूट दी गई है।
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
पंजाब-सिंध-गुजरात-मराठा
द्राविंड-उत्कल-बंग
विंध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशीष मांगे
गाहे तव जय गाथा
जन- गण मंगलदायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय-जय-जय, जय हे।
रविन्द्रनाथ टैगोर
* राष्ट्रीय गीत। वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम् गीत बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा संस्कृत में रचा गया है; यह स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था। इसका स्थान जन- गण मन के बराबर है। इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था।इसका पहला अंतरा इस प्रकार हैं।,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज
शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्!
वन्दे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रूमदल शोभिनिम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्
सुखदाम् वरदाम् , मातरम्!
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।।





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