मकर संक्रान्ति कब और क्यों मनाई जाती हैं?
मकर संक्रान्ति इस बार 14 जनवरी को आ रही हैं इस दिन मंगलवार आएगा। मकर संक्रान्ति को दान को बहुत महत्व है ये अलग जगहों पर अलग- अलग नाम से मनाई जाती है। इस दिन सूर्य की पूजा करने का विधान है इस दिन अलग- अलग खान पान भी बनाए जाते है इस दिन तिल और गुड़ को अधिक महत्व दिया जाता है कहते है इस दिन दान देने से दान का अधिक फल मिलता है। 80 साल पहले मकर संक्रान्ति 13 जनवरी को मनाई जाती थी लेकिन अब विषुवतों के अग्रगमन के कारण इसे 14 जनवरी को मनाया जाता हैं।
मकर संक्रान्ति के दिन सुबह लोग उटकर पूजा करते हैं उसके बाद तिल से बनी चीजों का दान करते हैं इस दिन तिल और गुड़ का अधिक महत्व दिया जाता हैं कहते है इस दिन दान देने से दान का अधिक फल मिलता है।
अब हम आप को बताते है की मकर संक्रान्ति क्यों मनाई जाती है क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और इस दिन सूर्य दक्षनायन से उत्तरायण होते है और उत्तरायण को देवताओं का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन तीर्थ में स्नान करना बहुत अच्छा माना जाता है और कई जगह तो इस दिन पितरों को तृप्त करने के लिए भी दान - पुण्य किया जात है
और मकर संक्रान्ति का क्या महत्व है मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य उत्तरयण होते है और ये दिन देवताओं का दिन माना जाता है इस दिन खर मास भी खत्म होते है इस दिन से शुभ काम सरू हो जाते है एक वर्ष दो अयन के बराबर होता है अयन दो होता है एक दक्षणायन होता हैं और दूसरा उत्तरायण होता है और इस दिन सूर्य दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा में प्रवेश करते हैं और इस दिन से रात और दिन में भी फर्क आने लग जाता है।
रात छोटी होने लग जाती है और दिन बड़े होने लग जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन मकर संक्रान्ति का व्रत किया जात है इस दिन तीर्थ में स्नान करने का बहुत महत्व है यकीन तीर्थ न हो तो घर में ही तिल पानी में तिल डालकर नहाना चाहिए।
सूर्य की पूजा भी विशेष मंत्रों के द्वारा करनी चाहिए। जैसे की ऋडमण्डलाय नम: ऊं सवीत्रे नमः ऊं वरुणा य नम:, ऊं सप्तस्पत्ये नमः ऊं मार्तण्डायनम: ऊं विष्ण वे नम: ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नमः ऊं सप्तार्चीषे न
Uneer की तरफ से आप सब को मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं।





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